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कोटखाई Gungrape: गुड़िया के मुंह में मिला कीड़ों का लारवा

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 कोटखाई case


शिमला : कोटखाई गुड़िया गैंगरेप-हत्याकांड मामलें में दिन प्रतिदिन नए-नए खुलासे होते जा रहें है. सी.बी.आई. की जांच में पता चला है कि गुडिय़ा की लाश 35 से 40 घंटे तक एक ही जगह रही. उसे किसी ने डिस्टर्ब नहीं किया. जंगली जानवरों ने भी नहीं खाया. सूत्रों के अनुसार सी.बी.आई. की जांच इसी बिंदू के इर्द-गिर्द घूम रही है. सी.बी.आई. की जांच एजैंसी को ऐसे सुराग मिले हैं, जिनके आधार पर पता चला है कि गुडिय़ा की जहां पर लाश मिली थी, उसके साथ दरिंदगी उसी के आसपास हुई है।



शव के मुंह व प्राइवेट पार्ट्स में कीड़ों का लारवा मिला। यह लारवा एक निश्चित समय के बाद ही पनपता है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी इसकी पुष्टि हुई है. हालांकि आधिकारिक तौर पर इसकी कोई भी अधिकारी इस स्टेज पर पुष्टि नहीं कर रहा है.

कोटखाई के हलाईला के बागवान अनंत राम नेगी का दावा है कि उनका गुडिय़ा मामले से कोई लेना-देना नहीं है. अनंत राम नेगी का कहना है कि 6 जुलाई को वह शिमला में थे. उन्हें शिमला में पता चला कि उनके बगीचे के पास किसी लड़की की लाश पाई गई है. नेगी के अनुसार उनके बेटे ने उसी वक्त इसकी सूचना मुख्य संसदीय सचिव रोहित ठाकुर को दी।

 उन्होंने ठाकुर से आग्रह किया कि वह इस केस के बारे में पुलिस महानिदेशक व गृह सचिव से बात करें और सुनिश्चित करें कि जुन्गा से फोरैंसिक टीम व डॉग स्क्वायड भेजे जाएं। नेगी का कहना है कि आरोपी को पकडऩे के लिए सी.एम. ऑफिस का कोई दबाव नहीं था.

सूरज की हत्या को लेकर भी पुलिस वालों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है. इस केस में पुलिस वाले भी आरोपी बन सकते हैं. इनमें थानेदार से लेकर कुछ कर्मियों व अधिकारियों की भूमिका संदेह के घेरे में है. 19 जुलाई को थाने में अन्य आरोपी राजू के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज हुआ था. इस केस की मैजिस्ट्रेट जांच के भी आदेश हुए थे लेकिन उसी दिन

हाईकोर्ट ने सी.बी.आई. जांच के आदेश दे दिए थे. इस कारण इस केस की न तो पुलिस ने जांच की और न ही मैजिस्ट्रेट जांच कर पाए. इसकी सी.बी.आई. से सीधी जांच चल रही है.

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