Breaking News

Manimahesh: भैरोघाटी के शिवघराट में पहाड़ से आती है घराट चलने की आवाज

Loading...
Manimahesh: भैरोघाटी के शिवघराट में पहाड़ से आती है घराट चलने की आवाज

भरमौर (Chamba)। पवित्र मणिमहेश यात्रा चमत्कारों और रहस्यों से भरी है। यात्रा के दौरान पड़ने वाले विभिन्न पड़ावों के तहत अलग-अलग चमत्कार और रहस्यों को जानने का भी मौका मिलता है। भैरोंघाटी से यात्रा के दौरान राह में शिवघराट नामक जगह आती है। यहां पर स्थित एक पहाड़ से कान लगाने पर आटा पिसने वाले घराट के चलने की आवाज सुनाई देती है। यात्रा पर आने वाले भोले के भक्त शिव के इस रहस्य को सुनने से किसी भी हद में पीछे नहीं रहते हैं। शिवघराट समुद्र तल से करीब दस हजार फीट पर ऊंचाई पर स्थित है।

गौरतलब हो कि पवित्र मणिमहेश यात्रा के सबसे महत्वपूर्ण कहें जाने वाले पड़ाव धन्छौ में पहुंचने वाले श्रद्धालु रात भर यहां पर विश्राम करने के बाद अगली सुबह सुंदरासी पड़ाव की यात्रा को आरंभ करते हैं। धन्छौ पड़ाव से दो रास्तों (बांदर घाटी और प्राचीन प्राकृतिक झरने के साथ-साथ होते हुए) के जरिये श्रद्धालु अगले पड़ाव के लिए कूच करते हैं। धन्छौ पड़ाव से ही भोले के भक्तों की की अग्निपरीक्षा आरंभ हो जाती है। यहां से सीधी चढ़ाई आरंभ हो जाती है, जोकि गौरीकुंड तक रहती है। धन्छौ से जो श्रद्धालु भैरोंघाटी के रास्ते आगे बढ़ते हैं, उन्हें यहां स्थित एक पहाड़ से घराट के चलने की आवाज सुनाई देती है। मान्यता है कि जो श्रद्धालु सच्ची श्रद्धा और शिवशंकर पर विश्वास कर पहाड़ से कान लगाकर आवाज सुनने की कोशिश करता है तो उसे ऐसा प्रतीत होता है कि पहाड़ के भीतर घराट चल रहा हो।

मणिमहेश यात्रा पर अमृतसर से आए श्रद्धालु विक्रमजीत सिंह, अमरजीत सिंह और कमलेश्वर का कहना है कि भोले की नगरी चमत्कारों और रहस्यों से भरी हुई है। यात्रा के तहत पड़ने वाले विभिन्न पड़ावों पर उन्हें नये-नये चमत्कार और रहस्यों को जानने का मौका मिला है। इन रहस्यों में पत्थर के पहाड़ के भीतर से घराट के चलने की आवाज आना भी एक है। कुल मिलाकर भोले की नगरी में सब कुछ शिवशंकर की दया दृष्टि पर ही निर्भर करता है।

मणिमहेश पुजारी हिमपत, पुन्नू और पवन शर्मा बताते हैं कि भैरोंघाटी से ऊपर पहुंचने पर एक पहाड़ के भीतर से घराट चलने की आवाज सुनाई देती है। इसी वजह से इस जगह को शिवघराट के नाम से जाना जाता है। यहां पर श्रद्धालुओं को घराट चले की आवाज साफ सुनाई देती है। इस आवाज को श्रद्धालु महसूस भी करते हैं।

धन्छौ के महंत आकाश गिरी बताते है कि जो श्रद्धालु सच्ची श्रद्धा और भगवान शंकर की उपासना करते है उनकी यात्रा सफल रहती है। उन्होंने कहा कि धन्छौ के ठीक ऊपर वीरभद्र का मंदिर है। इसे मणिमहेश यात्रा का प्रवेश द्वार भी कहा जाता है।

कोई टिप्पणी नहीं