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एयरफोर्स में लड़ाकू विमान उड़ाएगी बस स्टैंड पर चाय बेचने वाले की बेटी..इसे कहते हैं मेहनत


‘मंजिले उनको मिलती हैं जिनके सपनों में जान होती हैं, पंखों से कुछ नहीं होता हौसलों से उड़ान होती हैं।’ ये पंक्तियां मध्य प्रदेश के नीमच में रहने वाली 24 साल की आंचल गंगवाल पर फिट बैठती हैं। चाय की दुकान लगाने वाले सुरेश गंगवाल की बेटी आंचल का सपना बचपन से आसमान छूने का था। सपना पूरा करने के लिए आंचल दिन रात मेहनत में जुटी रहीं और परिणाम यह हुआ कि जून 2018 में आंचल का चयन एयरफोर्स की फ्लाइंग ब्रांच में हुआ।

एयरफोर्स की फ्लाइंग ब्रांच में भर्ती के लिए सिर्फ 22 पद निकले थे और देशभर से इसके लिए लाखों उम्मीदवारों ने अप्लाई किया था। इन 22 पदों पर सफल हुए उम्मीदवारों में 5 लड़किया भी शामिल हैं। आंचल मध्य प्रदेश से चयनित होने वाली एकमात्र उम्मीदवार थीं।

एक अंग्रेजी अखबार से बात करते हुए आंचल ने बताया, ‘जब मैं 12वीं में थी तो उत्तराखंड में बाढ़ आई थी। इस दौरान सशस्त्र बलों द्वारा जिस तरह रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम दिया गया उससे मैं काफी प्रभावित हुई और फिर मैंने निश्चय किया कि मैं भी वायुसेना ज्वॉइन करूंगी। लेकिन उस समय मेरे परिवार की हालत ठीक नहीं थी।’ आंचल ने ग्रेजुएशन के दौरान ही प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर दी थी और बाद में व्यापमं के जरिए उनका सलेक्शन लेबर इंसपेक्टर के रूप में हुआ।

आंचल के पिता सुरेश गंगवाल नीमच बस स्टैंड के पास एक चाय का स्टॉल चलाते हैं। सुरेश बताते हैं, ‘यह मेरे लिए गर्व की बात है। अब हर कोई मेरे ‘नामदेव टी स्टॉल’ को जानता है। मुझे बहुत अच्छा महसूस हो रहा है, सब लोग मुझे बधाई दे रहे हैं।आंचल ने अपनी कड़ी मेहनत की बदौलत यह सफलता हासिल की है।’

आंचल को सफलता इतनी आसानी से नहीं मिली है और इससे पहले उन्होंने 5 बार एसएसबी इंटरव्यू फेस किया था लेकिन सफलता छठी बार में मिली। आप पढ़ रहे हैं हिमाचली ख़बर। आपको बता दें कि एसएसबी का इंटरव्यू 5 दिन तक चलता है जिसमें उम्मीदवार को स्क्रीनिंग और साइकोलॉजिकल टेस्ट के साथ ग्राउंड टेस्ट सहित कई टेस्टों से गुजरता पड़ता है। आपको बता दें कि देश की पहली महिला लड़ाकू पायलट अवनि चतुर्वेदी भी मध्यप्रदेश से ही ताल्लुक रखती हैं। अवनि चतुर्वेदी ने इसी साल फरवरी में अकेले ही मिग-21 से उड़ान भरकर इतिहास रचा था।

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